AIIMS दिल्ली से वरिष्ठ डॉक्टरों के इस्तीफों और VRS के बढ़ते मामलों चिंताजनक

AIIMS दिल्ली से वरिष्ठ डॉक्टरों के इस्तीफों और VRS के बढ़ते मामलों ने देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में फैकल्टी की कमी और बढ़ते मरीजों के दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संसद में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, साल 2025 में AIIMS दिल्ली के 6 वरिष्ठ डॉक्टरों ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली। वहीं अप्रैल 2018 से जुलाई 2025 के बीच 58 फैकल्टी डॉक्टरों (असिस्टेंट, एसोसिएट और एडिशनल प्रोफेसर) ने संस्थान छोड़ दिया।

पिकैक्स माउंटेन: ईरान का यह गोपनीय ठिकाना ट्रंप के निशाने पर क्यों है?

हाल ही में ईरान को लेकर अपनी धमकियों में डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसी जगह का ज़िक्र किया, जो देश के दूसरे परमाणु ठिकानों जितनी मशहूर नहीं है.

जब उनसे उन ख़बरों के बारे में पूछा गया कि तेहरान ने शायद परमाणु सेंट्रीफ़्यूज ‘पिकैक्स माउंटेन’ में पहुंचा दिए हैं, तो ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस भूमिगत परिसर पर “बहुत भारी हमला करेगा… शायद बहुत जल्द.”

ईरान का कहना है कि यह बेहद मज़बूत और कड़ी सुरक्षा वाला निर्माणाधीन परिसर है. यह बाद में नतांज़ स्थित एडवांस सेंट्रीफ़्यूज उत्पादन और असेंबली केंद्र की जगह लेगा. नतांज़ शहर, इस्फ़हान प्रांत में है जो राजधानी तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है.

लेकिन इस परिसर के अनुमानित आकार, इसकी सुरंगों की गहराई और अंतरराष्ट्रीय निगरानीकर्ताओं को यहां पहुंच की अनुमति न मिलने के कारण यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि पिकैक्स माउंटेन का इस्तेमाल ईरान किसी और मक़सद के लिए भी कर सकता है.

इस जगह का संबंध ईरान के उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को लेकर उठे सवालों से भी जोड़ा गया है. 2 जुलाई 2020 को नतांज़ परमाणु परिसर में एक विस्फोट हुआ था. ईरान ने इसे तोड़फोड़ की कार्रवाई बताया था. कई रिपोर्टों में इसके लिए इसराइल को ज़िम्मेदार ठहराया गया, हालांकि इसराइल ने कभी इसकी ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं की.

कुछ महीनों बाद, ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के तत्कालीन प्रमुख अली अकबर सालेही ने घोषणा की कि एक नया केंद्र बनाया जाएगा. उनके मुताबिक़, यह केंद्र ज़्यादा आधुनिक, बड़ा और अधिक व्यापक होगा और पास के एक पहाड़ के भीतर स्थापित किया जाएगा.

इसके बाद 2020 की सर्दियों में कोलांग ग़ज़ला या पिकैक्स पर्वत में इस नए ठिकाने के संकेत दिखाई देने लगे. यह जगह नतांज़ से लगभग 2 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है.

सैटेलाइट तस्वीरों में पहाड़ के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में दो-दो सुरंग प्रवेश द्वार दिखाई देते हैं. इसके अलावा, दक्षिणी तरफ़ भी एक रास्ता या प्रवेश द्वार नज़र आता है

इस फ़ैसिलिटी के बारे में क्या-क्या पता है?

अमेरिका स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी (आईएसआईएस) का कहना है कि समुद्र तल से लगभग 1,608 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस पर्वत की चोटी पर कई भूमिगत स्तर हो सकते हैं. लेकिन आंतरिक योजनाओं तक पहुंच के बिना इनकी मात्रा निर्धारित करना असंभव है.

सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ के अनुसार, जून 2025 में इसराइल के साथ 12 दिनों तक चले युद्ध के बाद ईरान ने इस स्थल तक पहुंच को और सख़्त कर दिया और लगभग पूरे परिसर के चारों ओर एक दीवार बना दी.

फरवरी 2026 में आईएसआईएस की ओर से किए गए विश्लेषण की उपग्रह तस्वीरों में पता चला कि सुरंग के प्रवेश द्वारों को मज़बूत किया जा रहा था.

एक तस्वीर में प्रवेश क्षेत्रों में से एक के ऊपर ताज़ा कंक्रीट बिछाया हुआ प्रतीत हो रहा था.

एक अन्य तस्वीर में दूसरी सुरंग के प्रवेश द्वार पर चट्टान और मिट्टी को समतल किया हुआ दिखाया गया. लेकिन आईएसआईएस के नवीनतम आकलन के अनुसार, यह परिसर अभी तक पूरी तरह से चालू नहीं हुआ है.

9 जुलाई 2026 की सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिलता है कि कुछ प्रवेश द्वार अब भी खुले हैं और वहां तक पहुंचा जा सकता है.

वहीं, सैटेलाइट तस्वीरों में नतांज़ या ईरान की अन्य परमाणु सुविधाओं- फ़ोर्दो और इस्फ़हान में पुनर्निर्माण के प्रयासों के बहुत कम संकेत दिखाई देते हैं. इन ठिकानों पर अमेरिका और इसराइल ने हमला किया था.

बीती 22 जुलाई को ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिकैक्स माउंटेन पर कोई परमाणु गतिविधि नहीं हो रही है.

आईएसआईएस का अनुमान है कि यह परिसर इतना बड़ा है कि इसमें छोटे पैमाने का यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) केंद्र स्थापित किया जा सकता है. इसमें उन्नत सेंट्रीफ़्यूज़ लगाए जा सकते हैं, जिनकी अलग करने की क्षमता (सेपरेटिव कैपेसिटी) अधिक होती है.

इसका मतलब है कि कम संख्या में मशीनों का इस्तेमाल करके भी उतनी ही मात्रा में संवर्धित यूरेनियम तैयार किया जा सकता है. साथ ही, इसके लिए कम जगह की आवश्यकता पड़ती है.

हालांकि, आईएसआईएस के पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वहां ऐसी सेंट्रीफ़्यूज़ श्रृंखलाएं (कैस्केड) स्थापित की जा चुकी हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि सैटेलाइट तस्वीरों में वे संकेत दिखाई नहीं देते जो आम तौर पर किसी परमाणु रिएक्टर के निर्माण से जुड़े होते हैं. उदाहरण के लिए, वहां कूलिंग टावर, इस्तेमाल किए जा चुके ईंधन (स्पेंट फ़्यूल) को रखने का पूल, या बड़े पैमाने का जलापूर्ति नेटवर्क नज़र नहीं आता.

इस पृष्ठभूमि में पिकैक्स माउंटेन का नाम कई तरह की अटकलों में लिया जाने लगा है. लेकिन आईएईए की किसी आधिकारिक रिपोर्ट, सार्वजनिक ख़ुफ़िया दस्तावेज़ या सत्यापित तस्वीर में इस बात का समर्थन करने वाला कोई सबूत नहीं मिला है.

अमेरिका ने बंकर बस्टर बम से हमले के लिए क्या तैयारी की थी

अमेरिका ने ईरान की फ़ोर्दो परमाणु सुविधा पर जीबीयू-57 बंकर बस्टर बम से हमला किया था. यह 13.6 टन वज़नी बम है, जिसे मिट्टी, चट्टानों और मज़बूत कंक्रीट की कई परतों को भेदने के बाद विस्फोट करने के लिए बनाया गया है.

हालांकि, ऐसे हमले की सफलता कई बातों पर निर्भर करती है. इनमें चट्टानों का प्रकार, परिसर की गहराई और बम के प्रहार का कोण शामिल हैं.

फ़ोर्दो पर हमले से पहले अमेरिका और इसराइल ने वर्षों तक उस स्थल के बारे में जानकारी जुटाई थी. लेकिन मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के परमाणु शोधकर्ता मैथ्यू शार्प ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा कि पिकैक्स माउंटेन पर हमला करने पर अमेरिका को वैसी सफलता मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

इसकी वजह यह है कि यह परिसर ज़्यादा गहराई में बना है और इसकी संरचना के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है. अगर परमाणु सामग्री पिकैक्स माउंटेन परिसर के सबसे गहरे हिस्सों में रखी गई है, तो यह साफ़ नहीं है कि हवाई हमला उसे नष्ट कर पाएगा या नहीं. हालांकि, ऐसा हमला वहां तक पहुंच और गतिविधियों को बाधित कर सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि सुरंगों के प्रवेश द्वार, पहुंच मार्ग, बिजली आपूर्ति और वेंटिलेशन सिस्टम अपेक्षाकृत ज़्यादा संवेदनशील हो सकते हैं. हमला भविष्य में इस परिसर के इस्तेमाल को भी मुश्किल या असंभव बना सकता है.

संभव है कि यही वजह हो कि हाल के दिनों में ट्रंप ने पिकैक्स माउंटेन को लेकर धमकियां दी हैं. इसकी ज़्यादा गहराई, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और ईरान के परमाणु कार्यक्रम में संभावित भूमिका के कारण यह परिसर अमेरिकी अधिकारियों के लिए विशेष ध्यान का केंद्र बन गया है.

अगर हर डॉक्टर अपना काम सिर्फ एक दिन के लिए रोक दे

डॉ. गौतम कुमार
MBBS, MS, M.Ch. (AIIMS)
यूरोलॉजिस्ट एवं सर्जन
भागलपुर, बिहार, भारत

ल्पना कीजिए एक ऐसे राष्ट्र की…

जहाँ हर डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल कर्मी और स्वास्थ्य पेशेवर सिर्फ एक दिन के लिए काम करना बंद कर दें।

कोई ओपीडी नहीं।
कोई सर्जरी नहीं।
कोई आपातकालीन सेवा नहीं।
कोई परामर्श नहीं।
कोई आश्वासन नहीं।
सिर्फ़ मौन।

यह कोई प्रयोग नहीं है। यह एक ऐसा विचार है, जो नागरिकों और नीति-निर्माताओं—दोनों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर देगा।

भारत में डॉक्टर दुनिया के सबसे कठिन कार्य वातावरणों में काम करते हैं। सीमित संसाधन, अत्यधिक मरीजों का बोझ और निरंतर मानसिक दबाव—इन सबके बीच वे वर्षों की कठिन शिक्षा और प्रशिक्षण के बाद समाज की सेवा करते हैं।

एक डॉक्टर बनने में लगभग 15–20 वर्षों का समर्पण, अध्ययन और अभ्यास लगता है। उनका प्रत्येक निर्णय किसी न किसी जीवन को प्रभावित करता है।

फिर भी, उनके पेशे का वास्तविक मूल्य अक्सर गलत समझा जाता है और कम आंका जाता है।

हर डॉक्टर के निर्णय के साथ परिणाम जुड़े होते हैं। हर मरीज को उम्मीद रहती है। हर उपचार एक जिम्मेदारी है।

भारत जैसे देश में, जहाँ हर वर्ष लगभग 1.5 लाख सड़क दुर्घटना में मौतें होती हैं, जहाँ रोकी जा सकने वाली बीमारियाँ अब भी व्यापक हैं और जहाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव है—वहाँ डॉक्टर बिना रुके, अक्सर पर्याप्त संसाधनों और सुरक्षा के बिना अपना कार्य करते हैं।

एक छोटी-सी अनजानी भूल भी वर्षों तक कानूनी लड़ाइयों, सार्वजनिक आलोचना और मानसिक आघात का कारण बन सकती है।

हम विलासिता, मनोरंजन और सुविधाओं पर खर्च करने में संकोच नहीं करते।

लेकिन जब बात जीवन बचाने वालों को उचित सम्मान और उनके श्रम का मूल्य देने की आती है, तो हम अक्सर हिचकिचाते हैं।

क्या हम सच में समझते हैं कि किसी जीवन को बचाने के लिए कितनी मेहनत, ज्ञान और जिम्मेदारी की आवश्यकता होती है?

डॉक्टरों का सम्मान करना अंध समर्थन नहीं है।

बल्कि यह उनके प्रशिक्षण, मानवता, समर्पण और निरंतर सेवा को पहचानना है।

यह केवल समाज से एक विनम्र अपील है कि वह अपने चिकित्सकों का सम्मान करे और उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान करे।

एक स्वस्थ भारत उसी स्वास्थ्य व्यवस्था पर निर्भर करता है जो अपने चिकित्सकों का सम्मान करती है, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है और उन्हें सशक्त बनाती है।

क्योंकि जब डॉक्टर मजबूत होते हैं, तभी राष्ट्र मजबूत होता है।

डॉ. गौतम कुमार
MBBS, MS, M.Ch. (AIIMS)
यूरोलॉजिस्ट एवं सर्जन
भागलपुर, बिहार

📞 +91 7759002491

ईरान और अमेरिका के बीच सीज़फ़ायर क्यों नहीं टिक पाया?

अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौते के बाद जंग रुक गया, लेकिन स्थायी शांति स्थापित होने से पहले ही दोनों के बीच संघर्ष फिर शुरू हो गया.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की में कहा कि ‘सीज़फ़ायर समाप्त’ हो गया है. इस बयान के बाद यह आशंका और बढ़ गई कि केवल तीन सप्ताह पहले शुरू हुई बातचीत की प्रक्रिया बहुत जल्दी ख़त्म हो सकती है.

इस दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर सीज़फ़ायर का पूरी तरह पालन नहीं करने का आरोप लगाया और बीच-बीच में गोलीबारी की घटनाएं भी सामने आईं.

अब हमले फिर उसी स्तर पर शुरू हो गए हैं, जैसा दोनों देशों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर के पहले हो रहे थे.

ईरान और अमेरिका के बीच हुआ समझौता मध्य पूर्व संकट से बाहर निकलने का रास्ता माना जा रहा था.

इसका मक़सद होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना, ऊर्जा बाजार पर दबाव कम करना और 60 दिन के अंदर एक स्थायी समझौते तक पहुंचने के लिए बातचीत करना था.

लेकिन इस दौरान फ़ारस की खाड़ी में सैन्य टकराव जारी रहे, जहाज़ों के आवागमन के रास्तों को लेकर विवाद बढ़ा, लेबनान को लेकर तनाव गहराया और दोनों पक्ष अपने-अपने वादों को लेकर नए विवाद में उलझ गए.

समझौते पर हस्ताक्षर करने के समय से ही कई विश्लेषकों का कहना था कि यह दस्तावेज़ उन प्रमुख मतभेदों को दूर नहीं कर पाया, जिनकी वजह से जंग की शुरुआत हुई थी

भागलपुर हवाई अड्डे के पास बने 845 भवनों को नोटिस पर बवाल, आज कमिश्नर ऑफिस का करेंगे घेराव

नगर निगम द्वारा हवाई अड्डे के पास 845 भवनों को नोटिस दिए जाने के खिलाफ भागलपुर में विरोध तेज हो गया है।

भागलपुर। हवाई अड्डे के आसपास मानकों से अधिक ऊंचे बने भवनों पर नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ लोगों का विरोध तेज हो गया है।

निगम द्वारा करीब 845 भवनों की सूची तैयार कर गृह स्वामियों को नोटिस जारी किए जाने के बाद प्रभावित लोगों में भारी नाराजगी है।

नोटिस में भवन मालिकों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ 14 जुलाई को नगर निगम कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

इसी मुद्दे पर रविवार को तिलकामांझी में प्रभावित भवन स्वामियों की एक आपात बैठक मुकेश मिश्रा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में लोगों ने नगर निगम की कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए कड़ा विरोध जताया।

वक्ताओं ने कहा कि नगर निगम वर्षों से इन्हीं भवनों के क्षेत्रफल और निर्माण के आधार पर नियमित रूप से होल्डिंग टैक्स वसूलता रहा है। ऐसे में अब अचानक इन्हें नियमों के विरुद्ध बताकर कार्रवाई करना समझ से परे हैं।

बैठक में लोगों ने यह भी कहा कि लगभग 15 वर्ष पहले भी हवाई अड्डे को चालू करने के प्रयास के दौरान इसी तरह का विवाद उत्पन्न हुआ था, लेकिन स्थानीय विरोध के बाद उस निर्णय को वापस लेना पड़ा था।

उनका कहना है कि वर्ष 1970 में घर बनाया गया था तो निगम उस समय कहां था। हवाई सेवा बंद है और इसके बाद आसपास का पूरा इलाका विकसित हो चुका है। ऐसे में वर्षों बाद लोगों को नोटिस भेजकर परेशानी में डालना उचित नहीं है।

आयुक्त का करेंगे घेराव

प्रभावित भवन स्वामियों ने घोषणा की कि सोमवार को सैकड़ों की संख्या में लोग नगर निगम कार्यालय पहुंचकर नगर आयुक्त का घेराव करेंगे। यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया और कार्रवाई जारी रही तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। लोगों ने स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर वे न्यायालय का भी रुख करेंगे।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि एक प्रतिनिधिमंडल नगर आयुक्त से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां और दस्तावेज प्रस्तुत करेगा। इसके अलावा जिला प्रशासन से भी मिलकर पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।

भागलपुर ब्लॉक की 64 पंचायतों में महाअभियान:एक दिन में लगाए गए 65,536 पौधे, पर्यावरण संरक्षण का संदेश

देवरिया के भागलपुर विकास खंड में रविवार को एक वृहद पौधरोपण अभियान चलाया गया। पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से यह अभियान ब्लॉक की सभी 64 ग्राम पंचायतों में एक साथ आयोजित किया गया। इस दौरान पूरे विकास खंड में कुल 65,536 पौधे लगाए गए। प्रत्येक ग्राम पंचायत में 1,024 पौधों के रोपण का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

अभियान का शुभारंभ खंड विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि संदीप सिंह ‘टिंकू’ और प्रभारी एडीओ पंचायत वैभव सिंह ने पौधे लगाकर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वृक्ष न केवल पर्यावरण की रक्षा करते हैं, बल्कि मानव जीवन, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने लोगों से पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण का भी आह्वान किया।