मीराबाई चनू ने लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता गोल्ड मेडल, तोड़े कई रिकॉर्ड

वेटलिफ़्टर मीराबाई चनू ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीत लिया है.
मीराबाई ने लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता है.
वेटलिफ़्टर मीराबाई चनू ने साल 2022 का बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड जीता था. चनू को पब्लिक वोटिंग के नतीजे आने के बाद विजेता घोषित किया गया था.
साल 2021 का बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड भी उन्होंने ही जीता था.
महिलाओं की 48 किलोग्राम की स्पर्धा में मीराबाई ने कई रिकॉर्ड तोड़े.
उन्होंने स्नैच में 85 किलोग्राम, क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम समेत कुल 190 किलोग्राम वज़न उठाया.
मीराबाई चनू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्नैच में 85 किलोग्राम वज़न उठाया है जो कि एक रिकॉर्ड है.
मीराबाई चनू ने लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता है लेकिन वो इससे पहले सिल्वर मेडल भी जीत चुकी हैं.
उन्होंने साल 2014 में ग्लासगो में ही कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था. इसके बाद उन्होंने साल 2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था, इसके बाद 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था.
मीराबाई ने टोक्यो ओलंपिक्स में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता था जो कि ऐसा इतिहास रचने वाली पहली भारतीय थीं.
भारत के हुए तीन मेडल
वहीं ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स 2026) के चौथे दिन ही रविवार को भारत की झोली में दूसरा मेडल आया था.
भारोत्तोलन यानी वेटलिफ़्टिंग में पुरुष वर्ग की 60 किलोग्राम स्पर्धा के फ़ाइनल में ऋषिकांत सिंह चनमबम ने कुल 264 किलोग्राम वज़न उठाकर रजत पदक जीता था. वो भी मीराबाई की तरह ही मणिपुर राज्य से संबंध रखते हैं.
राष्ट्रमंडल खेलों के चौथे दिन तक भारत को तीन पदक ही हासिल हो सके हैं. इससे पहले शुक्रवार को झंडू कुमार ने पैरा पावर लिफ़्टिंग में कांस्य पदक दिलाया था.
हालांकि, मुक्केबाज़ लवलीना बोरगोहेन का भी पदक पक्का हो गया है. ड्रॉ मैच के ज़रिए उन्हें सीधे सेमीफ़ाइनल में प्रवेश मिला है, जिसके बाद उनका कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित हो गया है.
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक़, वेट लिफ़्टर ऋषिकांत सिंह ने स्नैच स्पर्धा में 121 किलोग्राम वज़न उठाकर खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया.
इसके बाद क्लीन एंड जर्क में 143 किलोग्राम वज़न उठाया. इस तरह उन्होंने कुल 264 किलोग्राम वज़न उठाकर रजत पदक अपने नाम किया.
फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल: मेसी ने कैसे आख़िरी मिनटों में इंग्लैंड के सपनों पर पानी फेर दिया
“अर्जेंटीना, लियो के आख़िरी गोल के लिए, मैं तुम्हें लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनते देखना चाहता हूँ.”
2026 के फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप के दौरान अर्जेंटीना के प्रशंसकों का यह गीत हर जगह और हर समय गूंजता रहा है. सबसे मुश्किल पलों में भी उन्होंने इसी गीत से अपनी टीम का हौसला बढ़ाया.
और इस वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना को कई मुश्किल दौर से गुज़रना पड़ा है.
ताजा मिसाल बुधवार का सेमीफाइनल है. टीम 85वें मिनट तक 0-1 से पीछे थी, तभी एंजो फर्नांदेज़ ने शानदार गोल कर स्कोर बराबर कर दिया.
अटलांटा स्टेडियम में मौजूद अर्जेंटीना के प्रशंसकों का उत्साह देखते ही बनता था.वही जोश मैदान पर भी अर्जेंटीना के खिलाड़ियों में भी दिखाई दिया. लगातार हमलों के बीच 92वें मिनट (इंजरी टाइम) में लॉतारो मार्टिनेज़ ने विजयी गोल दागकर अर्जेंटीना को फ़ाइनल में पहुँचा दिया.
इस नाटकीय जीत के साथ अर्जेंटीना ने फ़ाइनल में जगह बना ली, जहाँ अगले रविवार को उसका सामना स्पेन से होगा. अर्जेंटीना की टीम लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप जीतने की कोशिश करेगी.
मैच के बाद कोच लियोनेल स्कालोनी ने कहा, “हम अलग हैं. यह अहंकार नहीं, दिल की ताक़त है. इन खिलाड़ियों ने जो किया, वह अविश्वसनीय है.”
लियोनेल मेसी की अगुआई वाली अर्जेंटीना की यह टीम, जिसके कप्तान अब तक आठ गोल कर चुके हैं, हर बार मुश्किल हालात में वापसी करने का रास्ता निकालने में कामयाब रही है.
ऐसे ही मौक़ों पर अर्जेंटीना में फुटबॉल का जुनून सबसे ज़्यादा दिखाई देता है. साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि बाक़ी 25 खिलाड़ी मेसी को उनके संभावित आख़िरी वर्ल्ड कप में चैंपियन बनाने के लिए किस हद तक प्रतिबद्ध हैं.
कहानी अभी ख़त्म नहीं हुई है
चार साल पहले ऐसा लग रहा था कि लियोनेल मेसी की कहानी पूरी हो चुकी है.
35 साल की उम्र में उन्होंने आख़िरकार वर्ल्ड कप जीत लिया था. उन्होंने तब कहा था कि यह टूर्नामेंट में उनका आख़िरी मैच होगा. कई लोगों की नजर में उसी जीत के साथ उन्होंने ख़ुद को फुटबॉल इतिहास का सबसे महान खिलाड़ी साबित कर दिया था.
लेकिन उससे भी चार साल पहले, जब उनकी उम्र 31 साल थी, तब बहुत से लोगों को, यहाँ तक कि उनके क़रीबी लोगों को भी, लगता था कि वह अपना आख़िरी वर्ल्ड कप खेल चुके हैं और वर्ल्ड चैंपियन बने बिना ही करियर ख़त्म कर देंगे.
लेकिन अब 39 साल की उम्र में मेसी एक बार फिर अर्जेंटीना को लगातार दूसरे वर्ल्ड कप फ़ाइनल में पहुँचाने वाले सबसे बड़े नायक बनकर सामने आए हैं. इस बार उन्होंने इंग्लैंड की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया.
इंग्लैंड पर 2-1 की जीत में मेसी ने दोनों गोल में मदद की. इसके साथ ही 2026 वर्ल्ड कप में उनके आठ गोल और चार असिस्ट हो चुके हैं.
वह इस वर्ल्ड कप में संयुक्त रूप से सबसे ज़्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं और सबसे ज़्यादा असिस्ट देने वाले खिलाड़ियों की सूची में दूसरे स्थान पर हैं.
अब रविवार को न्यू जर्सी में होने वाले फ़ाइनल में अर्जेंटीना का सामना स्पेन से होगा. स्पेन वही देश है, जहाँ मेसी ने बार्सिलोना के लिए अपने करियर का सबसे बड़ा हिस्सा खेला.
अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी ने कहा, “वह इतिहास के सबसे महान खिलाड़ी हैं. मुझे नहीं पता कि इसे साबित करने के लिए उन्हें और क्या करना होगा. स्पेन के ज़्यादातर लोग भी उनसे प्यार करते हैं.”
बीबीसी के फुटबॉल विश्लेषक मिका रिचर्ड्स ने कहा, “अर्जेंटीना के पास लियोनेल मेसी हैं. उनके पास ‘ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम’ है. फुटबॉल इतिहास का सबसे महान खिलाड़ी.”
उन्होंने कहा, “ऐसे मुक़ाबले ख़ास पलों से तय होते हैं. हमें लगा था कि यह काम जूड बेलिंगहैम या हैरी केन करेंगे, लेकिन यही वजह है कि मेसी आज भी बादशाह हैं.”
चार साल पहले ऐसा लग रहा था कि लियोनेल मेसी की कहानी पूरी हो चुकी है.
35 साल की उम्र में उन्होंने आख़िरकार वर्ल्ड कप जीत लिया था. उन्होंने तब कहा था कि यह टूर्नामेंट में उनका आख़िरी मैच होगा. कई लोगों की नजर में उसी जीत के साथ उन्होंने ख़ुद को फुटबॉल इतिहास का सबसे महान खिलाड़ी साबित कर दिया था.
लेकिन उससे भी चार साल पहले, जब उनकी उम्र 31 साल थी, तब बहुत से लोगों को, यहाँ तक कि उनके क़रीबी लोगों को भी, लगता था कि वह अपना आख़िरी वर्ल्ड कप खेल चुके हैं और वर्ल्ड चैंपियन बने बिना ही करियर ख़त्म कर देंगे.
लेकिन अब 39 साल की उम्र में मेसी एक बार फिर अर्जेंटीना को लगातार दूसरे वर्ल्ड कप फ़ाइनल में पहुँचाने वाले सबसे बड़े नायक बनकर सामने आए हैं. इस बार उन्होंने इंग्लैंड की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया.
इंग्लैंड पर 2-1 की जीत में मेसी ने दोनों गोल में मदद की. इसके साथ ही 2026 वर्ल्ड कप में उनके आठ गोल और चार असिस्ट हो चुके हैं.
वह इस वर्ल्ड कप में संयुक्त रूप से सबसे ज़्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं और सबसे ज़्यादा असिस्ट देने वाले खिलाड़ियों की सूची में दूसरे स्थान पर हैं.
अब रविवार को न्यू जर्सी में होने वाले फ़ाइनल में अर्जेंटीना का सामना स्पेन से होगा. स्पेन वही देश है, जहाँ मेसी ने बार्सिलोना के लिए अपने करियर का सबसे बड़ा हिस्सा खेला.
अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी ने कहा, “वह इतिहास के सबसे महान खिलाड़ी हैं. मुझे नहीं पता कि इसे साबित करने के लिए उन्हें और क्या करना होगा. स्पेन के ज़्यादातर लोग भी उनसे प्यार करते हैं.”
बीबीसी के फुटबॉल विश्लेषक मिका रिचर्ड्स ने कहा, “अर्जेंटीना के पास लियोनेल मेसी हैं. उनके पास ‘ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम’ है. फुटबॉल इतिहास का सबसे महान खिलाड़ी.”
उन्होंने कहा, “ऐसे मुक़ाबले ख़ास पलों से तय होते हैं. हमें लगा था कि यह काम जूड बेलिंगहैम या हैरी केन करेंगे, लेकिन यही वजह है कि मेसी आज भी बादशाह हैं.”
2016 में ही मेसी ने की थी संन्यास की घोषणा
यह भूल जाना आसान है कि 2016 में, जब लियोनेल मेसी 29 साल के थे और बार्सिलोना के लिए खेल रहे थे, तब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी.
उससे पहले वह 2014 वर्ल्ड कप फ़ाइनल में जर्मनी से हार चुके थे और लगातार तीन कोपा अमेरिका फ़ाइनल भी गंवा चुके थे.
लेकिन संन्यास का फ़ैसला वापस लेने के बाद उन्होंने अर्जेंटीना को दो बार कोपा अमेरिका का चैंपियन बनाया.
2022 में, जब पेरिस सेंट-जर्मेन (पीएसजी) के खिलाड़ी के रूप में मेसी ने क़तर में वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाई, तो लगा कि उनके शानदार करियर की आख़िरी अधूरी कड़ी भी पूरी हो गई.
बहुत से लोगों का मानना था कि वर्ल्ड कप जीतना ही वह उपलब्धि थी, जिसकी कमी के कारण पेले और डिएगो माराडोना जैसे विश्व विजेताओं के साथ उनकी तुलना अधूरी मानी जाती थी.
2022 वर्ल्ड कप फ़ाइनल से पहले मेसी ने कहा था, “मैं बहुत खुश हूँ कि वर्ल्ड कप में मेरा सफ़र फाइनल तक पहुँचा और आख़िरी मैच फ़ाइनल में खेलने का मौक़ा मिला. इससे बड़ी संतुष्टि और क्या हो सकती है.”
उन्होंने कहा था, “अगले वर्ल्ड कप तक काफ़ी समय है. मुझे नहीं लगता कि मैं वहाँ तक खेल पाऊंगा. इसलिए इस तरह अपने सफ़र का अंत करना शानदार होगा.”
2023 में जब उन्होंने यूरोप छोड़कर मेजर लीग सॉकर (एमएलएस) की टीम इंटर मियामी का रुख़ किया, तो लगा कि अब वह अपने करियर के अंतिम दौर में हैं.
पिछले साल फ़ीफ़ा क्लब वर्ल्ड कप में खेलने के बावजूद यह बिल्कुल तय नहीं था कि वह इस साल वर्ल्ड कप में भी नज़र आएंगे.
लेकिन 39 साल की उम्र में भी मेसी का सफ़र थमता नहीं दिख रहा, भले ही उनके खेलने का अंदाज़ पहले से बदल चुका हो.
स्पेनिश पत्रकार गुइयेम बलागे, जिन्होंने मेसी की जीवनी लिखी है, कहते हैं कि मेसी ने अपने करियर में कम से कम पाँच बार अपने खेल को नए तरीक़े से ढाला है.
इंटर मियामी और अर्जेंटीना के लिए मेसी अब लगातार 13 मैचों में या तो गोल कर चुके हैं या गोल करने में मदद कर चुके हैं.
अगर वह रविवार को स्पेन के ख़िलाफ़ फाइनल में भी किसी गोल में योगदान देते हैं, तो 2011 में बनाए गए लगातार 14 मैचों के अपने रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगे.
इसके अलावा वह ब्राज़ील के महान खिलाड़ी काफू के बाद वर्ल्ड कप के तीन फाइनल खेलने वाले इतिहास के सिर्फ़ दूसरे खिलाड़ी बन जाएंगे.
क्या यही उनका आख़िरी वर्ल्ड कप मुक़ाबला होगा? आख़िर 2030 में उनकी उम्र 43 साल हो जाएगी.
लेकिन शायद अब आठ बार के बैलन डी’ऑर विजेता मेसी के बारे में कोई भी निश्चित अनुमान लगाना ठीक नहीं होगा.
इस वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना फुटबॉल के चार यादगार पल
ग्रुप स्टेज में तीन अपेक्षाकृत आसान जीत के बाद स्कालोनी की टीम की असली परीक्षा शुरू हुई.
सबसे पहले प्री-क्वॉर्टर फ़ाइनल में इस वर्ल्ड कप की सबसे बड़ी सरप्राइज टीम केप वर्डे से मुक़ाबला हुआ. निर्धारित समय तक मैच 1-1 से बराबरी पर रहा.
अतिरिक्त समय के पहले हाफ़ की शुरुआत में लिसांद्रो मार्टिनेज़ ने अर्जेंटीना को बढ़त दिलाई, लेकिन लगभग 10 मिनट बाद केप वर्डे ने बॉक्स के बाहर से शानदार गोल कर फिर बराबरी कर ली.
इसके बाद अर्जेंटीना का दबाव रंग लाया. कॉर्नर से आए हेडर को केप वर्डे के एक खिलाड़ी ने अनजाने में अपने ही गोल में पहुंचा दिया और अर्जेंटीना ने जीत दर्ज कर ली.
इसके बाद मिस्र के ख़िलाफ़ रोमांचक वापसी देखने को मिली. 79वें मिनट तक मिस्र 2-0 से आगे था, तभी क्रिस्टियन “कूटी” रोमेरो ने गोल कर अर्जेंटीना की उम्मीदें जगा दीं.
एक बार फिर अर्जेंटीना के आक्रामक खेल ने असर दिखाया और 83वें मिनट में मेसी ने बराबरी का शानदार गोल दाग दिया.
जब मुक़ाबला अतिरिक्त समय में जाता दिख रहा था, तभी 93वें मिनट में एंजो फर्नांदेज़ ने विजयी गोल कर अर्जेंटीना को यादगार जीत दिला दी. हालांकि इस मुक़ाबले में रेफरिंग को लेकर विवाद भी रहा.
क्वॉर्टर फ़ाइनल भी अर्जेंटीना ने अतिरिक्त समय में जीता. टीम 10वें मिनट से बढ़त बनाए हुए थी, लेकिन स्विट्जरलैंड के डैन न्दोये ने 67वें मिनट में स्कोर बराबर कर दिया.
पूरा स्टेडियम अर्जेंटीना के समर्थन में गूंज रहा था. 112वें मिनट में जूलियन अल्वारेज़ ने शानदार गोल कर गतिरोध तोड़ा और नौ मिनट बाद लाउतारो मार्टिनेज़ ने एक और गोल कर जीत पक्की कर दी.
अर्जेंटीना की चौथी यादगार रात सेमीफ़ाइनल में आई, जब इंजरी टाइम में लॉतारो मार्टिनेज़ के गोल ने टीम को फ़ाइनल में पहुँचा दिया.
इन सभी मुक़ाबलों में खिलाड़ियों के जश्न का एक ख़ास दृश्य बार-बार देखने को मिला. हर बड़ी जीत के बाद पूरी टीम लियोनेल मेसी को अपने कंधों पर उठाकर जश्न मनाती रही.
टी-20 में लाचार नज़र आ रही टीम इंडिया ने अक्षर पटेल के सहारे यूं किया इंग्लैंड को चारों खाने चित
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ एजबेस्टन में तीन मैचों की सिरीज़ के पहले मुक़ाबले में भारत ने छह विकेट से जीत दर्ज की है.
इंग्लैंड ने टी-20 सिरीज़ में मेहमान टीम को 4-0 से हराकर शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन यह एक अलग भारतीय टीम थी, जिसे विराट कोहली, रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह और शुभमन गिल जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की वापसी से मज़बूत होने की संभावना बढ़ी.
259 रन के मामूली लक्ष्य का पीछा करते हुए गिल ने सबसे अहम योगदान दिया. लेकिन जब भारत लक्ष्य से 99 रन दूर था तब उसके चार विकेट गिर चुके थे और गिल रिटायर्ड हर्ट हो चुके थे.
लेकिन अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर पर इसका कोई असर नहीं पड़ा. अक्षर ने आक्रामक बल्लेबाज़ की भूमिका निभाई, जबकि सुंदर ने एक छोर संभाले रखा. भारत ने 28 गेंद शेष रहते जीत दर्ज कर ली.
अक्षर ने ना केवल 52 गेंद पर 57 रन बनाए बल्कि चार विकेट भी झटके. इंग्लैंड शायद 290 रन तक पहुंच सकता था, लेकिन अक्षर पटेल ने डॉसन को डीप स्क्वायर लेग पर पुल शॉट खेलने के लिए मजबूर किया, जहाँ उनका कैच हो गया. इसके बाद बाएं हाथ के स्पिनर अक्षर ने निचले क्रम के बल्लेबाज़ों को जल्दी-जल्दी आउट कर पारी समेट दी.
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