झारखंड में आमरण अनशन पर बैठे देवेंद्रनाथ महतो कौन हैं, स्टूडेंट्स की क्या है मांग

बीती दो जुलाई को झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (जेपीएससी) 14वीं की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम आए.

कुल 2,204 अभ्यर्थियों ने मेंस यानी मुख्य परीक्षा के लिए Qualify किया. मुख्य परीक्षा की तारीख़ 18 से 20 जुलाई तय की गई.

रिज़ल्ट आते ही सवालों का सिलसिला शुरू हो गया. कैटेगरी-वाइज़ कट ऑफ़ जारी नहीं हुई. इसी बीच एक अभ्यर्थी की कथित ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओएमआर) शीट सोशल मीडिया पर वायरल हुई.

कथित तौर पर इसमें उसने सिर्फ़ 48 सवाल भरे थे, फिर भी उसका चयन मुख्य परीक्षा के लिए हो गया था.

साथ ही जो परिणाम जारी किए गए, उस पर जेपीएससी के अध्यक्ष, सचिव या सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे. जो कि नियमानुसार होने चाहिए थे. इसके बाद मुख्य परीक्षा को कैंसल कर दिया गया.

अब इन कथित गड़बड़ियों को लेकर राज्य के स्टूडेंट्स आंदोलन कर रहे हैं.

स्टूडेंट्स का आरोप है कि जेपीएससी के पेपर लीक किए गए, सीटें बेची गई हैं और उन्हें सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं है, मामले की जांच ईडी या सीबीआई को सौंपी जाए.

आंदोलन की शुरुआत स्टूडेंट लीडर और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) से जुड़े देवेंद्रनाथ महतो ने 25 जुलाई को राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित गांधी प्रतिमा के सामने धरना देने के साथ की.

शुरुआत में महज़ कुछ सौ लोग जुटे, लेकिन धीरे-धीरे सोशल मीडिया के माध्यम से समर्थन और भीड़ बढ़ने लगी.

मोरहाबादी स्थित फुटबॉल स्टेडियम में चल रहे डूरंड कप मैच के चलते ज़िला प्रशासन ने 26 जुलाई को धरनास्थल बदल दिया.

अब यह अटल स्मृति वेंडर मार्केट के नज़दीक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के भीतर चल रहा है. यहां तब से रोज़ाना सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं आ जा रहे हैं.

आगामी 6 अगस्त को स्टूडेंट्स ने विधानसभा घेराव की घोषणा की थी क्योंकि इसी दिन से झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा था. लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है.

इस बीच देवेंद्र महतो ने बीती दो अगस्त से आमरण अनशन की घोषणा कर दी है.

कौन हैं देवेंद्रनाथ महतो?

देवेंद्र रांची ज़िले के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव के रहनेवाले हैं. साल 2006 में प्रथम श्रेणी से दसवीं की परीक्षा पास की. इसके बाद साल 2008 में विज्ञान से इंटर और साल 2017 में रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय संस्कृत से ग्रेजुएशन किया. इसके बाद कुरमाली भाषा से पीजी किया और फिर बीएड भी.

रिटायर्ड सरकारी शिक्षक विशंभर महतो के बेटे देवेंद्र कॉलेज के दिनों से ही स्टूडेंट्स के हितों के मुद्दों को लेकर आंदोलन करने लगे थे.

सबसे पहले साल 2015 में रघुवर दास की सरकार के समय लागू की गई नियोजन नीति के विरोध में उन्होंने आंदोलन शुरू किया. इसके बाद साल 2016 में छात्रवृत्ति घटने के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरे.

साल 2019 में उनके जीवन में अहम मोड़ तब आया जब छठे जेपीएससी में कथित गड़बड़ियों को लेकर उन्होंने एक बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया. इस दौरान उनकी मां दमयंती देवी का निधन हो गया.

देवेंद्र बताते हैं कि इन्हीं आंदोलनों की वजह से साल 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान उन्हें जेल भेज दिया गया. जबकि वो बतौर निर्दलीय प्रत्याशी लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे.

जेल से चुनाव लड़ने के बावजूद उन्हें कुल 1.48 लाख वोट आए और वो तीसरे स्थान पर रहे थे. यहां से संजय सेठ सांसद हैं, जो कि वर्तमान में रक्षा राज्यमंत्री भी हैं.

फिर उसी साल नवंबर माह में होने वाले विधानसभा चुनाव में सिल्ली विधानसभा से किस्मत आज़माई.

इस चुनाव में उन्हें जयराम महतो की पार्टी जेएलकेएम ने अपना प्रत्याशी बनाया और उन्हें कुल 44 हज़ार वोट मिले. वो फिर तीसरे स्थान पर रहे.

देवेंद्र के मुताबिक़, स्टूडेंट्स के मुद्दों को लगातार उठाने और आंदोलन करने की वजह से उनके ऊपर इस वक्त 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं.

बीते 12 सालों से देवेंद्र के साथी रहे चंदन महतो उनके बारे में कहते हैं, ”उनके नेतृत्व में हुए स्टूडेंट्स मूवमेंट के दौरान झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमिशन (जेएसएससी)-सीजीएल परीक्षा को रद्द किया गया.”

“इसी तरह झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की मैट्रिक परीक्षा भी पेपर लीक की आशंका के बाद उसे भी रद्द करना पड़ा. स्टूडेंट्स के हितों की रक्षा और पारदर्शी भर्ती एवं परीक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर उनका संघर्ष हमेशा जारी रहा है.”

आमरण अनशन पर बैठे देवेंद्र की तबीयत पर रांची सदर अस्पताल के चिकित्सक लगातार नज़र बनाए हुए हैं.

उनके मुताबिक़, ब्लड प्रेशर लो है, शुगर घट रहा है. साथ ही थकान के अलावा डिहाइड्रेशन की बात उन्होंने कही है.

क्या हैं मांगें?

आखिर ये सब क्यों करना पड़ रहा है? किन मांगों को लेकर वो पहले धरना और फिर आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर हुए? देवेंद्र कहते हैं, ”पहली जेपीएससी से लेकर 14वीं तक, सभी परीक्षा विवादों में है. साल 2005-06 में आयोजित हुई दूसरी जेपीएससी परीक्षा की सीबीआई जांच होने के बावजूद कोर्ट से आज तक उसका अंतिम फैसला नहीं आ सका है.”

अनशन को लेकर जो मुख्य मांगें हैं, वो निम्नांकित हैं:-

  • मुख्य मांगों में इस बार, यानी 14वीं जेपीएससी परीक्षा को आयोजित करने वाली कंपनी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के द्वारा पूर्व में आयोजित किए गए सभी परीक्षाओं को रद्द किया जाए. क्योंकि मामले में मुख्य आरोपी और टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (सीजीएल) के ज़रिए खुद नौकरी हासिल की. इसके अलावा अपने भाई और भाई की पत्नी की भी नौकरी लगवाई. यहां तक कि, अभय ने जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की पीटी भी पास की थी.
  • इसके अलावा पूरे मामले की सीआईडी के अलावा सीबीआई और ईडी के द्वारा भी जांच कराई जाए. फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाए, ताकि त्वरित न्याय मिल सके. साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि न्याय आगामी तीन महीनों में मिले.
  • जेपीएससी और जेएसएससी के सभी भ्रष्ट पदाधिकारियों को हटाया जाए. आगामी होने वाली परीक्षाओं के लिए जेपीएससी और जेएसएससी में वैसे पदाधिकारियों को बहाल किया जाए, जिनका बीते 10 सालों का ट्रैक रिकॉर्ड साफ-सुथरा हो.
  • वर्तमान में जो कंपनी परीक्षा आयोजित कर रही है, यानी टीडीपीएल को ब्लैकलिस्ट किया जाए. उसके बाद टीसीएस जैसी कंपनियों को परीक्षा आयोजित कराने का ज़िम्मा सौंपा जाए. ताकि स्टूडेंट्स का विश्वास बहाल किया जा सके.

अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?

बीती 19 अप्रैल को 14वीं सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा राज्यभर में आयोजित हुई.

इसके बाद 2 जुलाई को इसका परिणाम घोषित किया गया. कुल 103 पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थियों का मुख्य परीक्षा के लिए चयन हुआ. मुख्य परीक्षा की तारीख 18 से 20 जुलाई तय की गई.

परिणाम आने के बाद कथित तौर पर पेपर लीक होने की बात सामने आने लगी. बीती 20 जुलाई को पहले जेपीएससी कार्यालय में सीआईडी ने छापेमापी कर तीन कर्मियों को गिरफ्तार किया.

उसी दिन देर शाम राज्य के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके और जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया.

इसे अगले दिन यानी 21 जुलाई को राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया. इसी तारीख को एफ़आईआर भी दर्ज की गई.

बढ़ते दबाव के बाद, सीएम हेमंत सोरेन ने 23 जुलाई को पूरे मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी. सीआईडी ने जेपीएससी कार्यालय सहित कुल आठ जगहों पर छापेमारी की.

इसमें परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता सहित अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

साथ ही जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांगते से बीते चार दिनों में कुल 32 घंटे से अधिक की पूछताछ की जा चुकी है. पूछताछ अब भी जारी है.

इसके अलावा जेपीएससी और जेएसएससी की ओर से 25 जुलाई से 29 सितंबर के बीच आयोजित होनेवाली सभी 9 परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं.

इसमें जेपीएससी की मुख्य परीक्षा के अलावा सिविल जज परीक्षा, सहायक लोक अभियोजक परीक्षा जैसी बेहद अहम भर्तियां शामिल हैं.

इस बीच मुद्दा एक होने के बावजूद स्टूडेंट मूवमेंट दो हिस्सों में बंट चुका है.

आंदोलन की शुरुआत करनेवाले देवेंद्र और उनके दल के नेताओं से यह कह दिया गया कि वो राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं, ऐसे में वो इस आंदोलन से ख़ुद को दूर रखें.

धरनास्थल पर भी दो मंच बन चुके हैं. एक मंच पर वो स्टूडेंट्स हैं, जो खुद को देवेंद्र महतो या उनके समर्थकों से दूरी बनाए रखे हैं. दूसरा मंच देवेंद्र महतो का है, जहां वो अनशन कर रहे हैं.

राज्य सरकार ने भी अब तक स्टूडेंट्स से बात करने के लिए किसी कमेटी का न तो गठन किया है, न ही किसी प्रतिनिधि को बातचीत करने के लिए भेजा है.

पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता बंधू तिर्की ने स्टूडेंट्स तक ज़रूर भोजन और पानी पहुंचाया है.

इस बीच, आगामी 6 अगस्त से आयोजित होने वाली झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान जेपीएससी मुद्दे पर ज़ोरदार हंगामा होने की पूरी संभावना है.

विपक्षी बीजेपी स्टूडेंट्स के मुद्दों को लगातार समर्थन दे रही है. साथ ही सीबीआई जांच की मांग कर रही है.

देवेंद्रनाथ महतो गुट के मुताबिक़ विधानसभा घेराव पूर्व निर्धारित तारीख़ 6 अगस्त को फ़िलहाल स्थगित किया गया है और नई तारीख़ जल्द घोषित की जाएगी.

वहीं स्टूडेंट्स के दूसरे गुट का नेतृत्व कर रहे पीयूष कुमार का कहना है कि 6 अगस्त को जो घेराव का निर्धारित कार्यक्रम था वो एक राजनीतिक दल का था, इसीलिए वो उससे ख़ुद को अलग रख रहे हैं, ऐसे में उन्होंने 10 अगस्त को घेराव का कार्यक्रम तय किया है

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा राष्ट्रपति ने किया स्वीकार, इन मंत्री को मिला शिक्षा मंत्रालय का ज़िम्मा

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है. उनके ख़िलाफ़ क़रीब एक महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन चल रहा था.

राष्ट्रपति भवन ने बयान जारी कर बताया है कि प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को स्वीकार कर लिया है.

इसी बयान में बताया गया है कि प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार दिया है.

प्रल्हाद जोशी फ़िलहाल उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री हैं और उनके पास नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भी है.

उधर, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ शनिवार को तीसरे दौर की बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रदर्शनकारियों से वापस जाने की अपील की.

सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि उनकी मांगें मान ली गई हैं और प्रदर्शनकारी अपने घर वापस लौटें. उन्होंने कहा कि चार सप्ताह बाद फिर से वो मुलाक़ात करेंगे और अपनी मांगों और आगे शिक्षा में सुधार पर चर्चा करेंगे.

नीट पेपर लीक के मामले पर देशभर में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर युवाओं का प्रदर्शन चला. पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इस्तीफ़े की मांग को लेकर 26 दिनों तक भूख हड़ताल की.

वहीं इस प्रदर्शन में शुरुआत से छात्र संगठन जुड़े रहे. वो भले मंच पर अनशन पर नहीं बैठे लेकिन मंच के किनारे अनशन पर बैठे रहे. ऑल इंडिया स्टूडेंट असोसिएशन यानी आइसा जो सीपीआई (एमएल) की छात्र शाखा है, इसके तीन छात्रों ने 23 दिनों तक अनशन किया.

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया एक्स पर शनिवार दोपहर बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफ़ा प्रधानमंत्री को भेजा है.

उन्होंने एक्स पर लिखा, “जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताक़तें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य क़ानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फ़ोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है.”

दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि “हमने कर दिखाया. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है.”

अभिजीत दीपके ने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है. यह इस बात का सबूत है कि अगर आप डरते नहीं हैं, अगर आप इस सरकार के सामने झुकते नहीं हैं, तो आप किसी से भी इस्तीफ़ा दिलवा सकते हैं. लोकतंत्र में डरने की ज़रूरत नहीं है.”

इससे पहले कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल भी उनके इस्तीफ़े की मांग पर अड़े थे.

धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा

धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर अपने संदेश का एक पत्र पोस्ट किया.

उन्होंने लिखा, “मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं. मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है.”

“मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूँ. भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है. आदरणीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं प्रधानमंत्री जी का आभार प्रकट करता हूं.”

नीट पेपर लीक के मामले पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “पहले ही दिन से, इस पर मैंने ज़िम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा. मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे.”

“परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ.”

उन्होंने लिखा, “जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है.”

जंतर-मंतर का आंदोलन

इससे पहले देश के 100 प्रमुख लेखकों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक सुधार की मांग कर रहे छात्रों के समर्थन में संयुक्त बयान जारी किया.

बयान में कहा गया कि पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने सार्वजनिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

इससे पहले शुक्रवार को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी. यह बातचीत क़रीब 2 घंटे तक चली. इसमें सीजेपी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग से पीछे नहीं हटने वाले हैं.

केद्र सरकार की ओर से बातचीत में शामिल जेपी नड्डा ने पत्रकारों को बताया था कि वे सीजेपी की मांग पर चर्चा के बाद शनिवार दोपहर बाद फिर से बातचीत करेंगे.

शनिवार को भी सरकार से तीसरे दौर की बातचीत से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को ‘नॉन-नेगोशिएबल’ बताया.

नीट-यूजी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है.

इन प्रदर्शनों में लद्दाख के शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हुए और वे अनशन पर बैठ गए. इस दौरान फ़िल्म, शिक्षा, कला, खेल और अन्य क्षेत्र के कई लोगों ने सीजेपी के आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया.

  • अगर हर डॉक्टर अपना काम सिर्फ एक दिन के लिए रोक दे

    भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था और इलाज करने वालों के महत्व पर एक चिंतन डॉ. गौतम कुमार MBBS, MS, M.Ch. (AIIMS)यूरोलॉजिस्ट एवं सर्जनभागलपुर, बिहार, भारत कल्पना कीजिए एक ऐसे राष्ट्र की… जहाँ हर डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल कर्मी और स्वास्थ्य पेशेवर सिर्फ एक दिन के लिए काम करना बंद कर दें। कोई ओपीडी नहीं।कोई सर्जरी नहीं।कोई आपातकालीन…

  • होर्मुज़ से गुज़रने वाले जहाज़ों पर क्या टोल लगा सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप, क्या कहता है क़ानून?

    होर्मुज़ स्ट्रेट अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है. इस पर कब्ज़े की बात को लेकर एक बार फिर से दोनों देश आमने-सामने आ गए हैं पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया कि अमेरिका ही होर्मुज़ का गार्डियन (संरक्षक) है और इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित…